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भारत के पूर्वोत्तर राज्यों पर पड़ेगा जलवायु परिवर्तन का सर्वाधिक प्रभाव

जनसंख्या में बेतहाशा वृद्धि और बदलते जीवन शैली का पृथ्वी के पर्यावरण पर प्रतिकूल असर पड़ा है। पिछले कुछ साल सदी के सबसे गर्म साल रहे हैं।

वैज्ञानिकों का मानना है कि पृथ्वी के बढ़ते तापमान और आद्रता से इस सदी के अंत तक भारत, बांग्लादेश और इण्डोनेशिया जैसे सघन आबादी वाले देश प्रभावित होंगे। भारत में संवेदनशील पर्यावरण का पूर्वोत्तर इलाका सर्वाधिक प्रभावित होगा। अमेरिका की कोलंबिया यूनिवर्सिटी के शोधकर्ताओं ने वैश्विक तापमान मॉडल का अध्ययन कर इस बात का पता लगाया है।

पहले के जलवायवीय अध्ययनों में आद्रता जैसे महत्वपूर्ण कारक को नजरअंदाज किया गया था। जबकि आद्रता कई जलवायवीय घटनाओं के लिए जिम्मेदार होता है। आद्रता गर्मी के प्रभाव को बढ़ाकर मौसम की स्थितियां बिगाड़ सकता है। इंवायरमेंटल रिसर्च लेटर्स में प्रकाशित इस शोध में बताया गया है कि बढ़ती हुई का कई देशों में प्रभाव बढ़ेगा।

दुनियाभर के करोड़ों लोगों को आद्रता बढ़ने की वजह से परेशानी उठानी पड़ेगी। भारत में इसका सबसे ज्यादा भारत के पूर्वोत्तर राज्यों में रहने वाले लोगों पर असर पड़ेगा। इसके अलावा दक्षिणी अमेरिका, मध्य और पश्चिमी अफ्रीका, अरब प्रायद्वीप, पूर्वी चीन आदि भी प्रभावित होंगे।

शोधकर्ता इथान कोफेल ने बताया कि वर्तमान में इन जगहों पर फिलहाल ऐसी समस्या दिखाई नहीं दे रही है लेकिन आने वाले समय के लिए पहले से तैयार रहना होगा। ग्लोबल क्लाइमेट मॉडल की मदद से वैज्ञानिकों ने वर्तमान और भविष्य के ‘वेट बल्ब’ तापमान का अध्ययन किया।

इस अध्ययन के मुताबिक वर्ष 2070 आते-आते 100 से 250 दिनों के लिए वेट बल्ब तापमान अधिकतम रहेगा। आद्रता बढ़ने के कारण वर्तमान के सूखे इलाके और सूखे जाएंगे। साथ ही तटीय इलाके अधिक आद्रता से प्रभावित होंगे। पूर्वोत्तर राज्यों की पारिस्थितिकी संवेदनशील है। अतः यहाँ जलवायु परिवर्तन का प्रभाव अधिकतर होगा।

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